RH 761 सरसों की एक अधिसूचित भारतीय सरसों किस्म है, जिसे वर्ष 2019 में जारी किया गया। यह किस्म लंबी फलियों, अपेक्षाकृत मोटे बीज और लगभग 40% तेल अंश के लिए जानी जाती है। इसका आधिकारिक अनुशंसित क्षेत्र जम्मू, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तरी राजस्थान है, विशेषकर समय पर बुवाई तथा वर्षा-आधारित खेती के लिए।
सही समय पर बुवाई, संतुलित पोषण, खरपतवार नियंत्रण और जरूरत के अनुसार सिंचाई रखने पर फसल का प्रदर्शन बेहतर मिलता है। अन्य राज्यों में बुवाई करने से पहले अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या कृषि विभाग की सलाह अवश्य लें।
मुख्य विशेषताएँ
- किस्म: RH 761
- फसल अवधि: लगभग 137–143 दिन
- औसत उपज: 26–27 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
- संभावित उपज: 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक
- तेल अंश: लगभग 40–40.4%
- विशेषता: लंबी फलियाँ और अपेक्षाकृत मोटे बीज
- उपयुक्त स्थिति: समय पर बुवाई एवं वर्षा-आधारित खेती
- अनुशंसित क्षेत्र: जम्मू, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तरी राजस्थान
बुवाई का समय
- उत्तरी भारत में सामान्यतः अक्टूबर का दूसरा पखवाड़ा उपयुक्त रहता है।
- बेहतर परिणाम के लिए लगभग 10 अक्टूबर से 25 अक्टूबर के बीच बुवाई का लक्ष्य रखें।
- देर से बुवाई पर पैदावार घट सकती है; स्थानीय मौसम और नमी देखकर निर्णय लें।
खेत की तैयारी
- खेत की मिट्टी भुरभुरी और समतल रखें।
- पिछली फसल के अवशेष हटाएँ।
- पानी खड़ा न होने दें; सरसों में जलभराव नुकसान करता है।
- बुवाई से पहले पर्याप्त नमी रखें। सूखे खेत में हल्की पलेवा सिंचाई करके वतर आने पर बुवाई की जा सकती है।
बीज दर और दूरी
- बीज दर: 1.75–2.0 किलोग्राम प्रति एकड़
- पंक्ति से पंक्ति दूरी: 30 सेमी
- पौधे से पौधे की दूरी: 10–15 सेमी
- बुवाई की गहराई: लगभग 2–3 सेमी रखें।
- 15–20 दिन बाद बहुत घने पौधों को हटाकर उचित दूरी बनाएँ।
ICAR की रबी सलाह में भारतीय सरसों के लिए 1.75–2.0 किग्रा प्रति एकड़ बीज दर और 30 सेमी पंक्ति दूरी बताई गई है।
सिंचाई प्रबंधन
RH 761 को वर्षा-आधारित दशाओं के लिए उपयुक्त माना गया है। फिर भी नमी की कमी हो तो हल्की सिंचाई उपज सुधार सकती है।
- पहली सिंचाई: शाखा निकलने की अवस्था, लगभग 30–35 दिन बाद
- दूसरी सिंचाई: फूल आने की अवस्था, लगभग 55–65 दिन बाद
- यदि पानी सीमित हो: फलियाँ बनने की अवस्था पर सिंचाई को प्राथमिकता दें।
- खेत में पानी भरने न दें।
HAU के अनुसार सरसों में सीमित नमी की स्थिति में शाखा अवस्था और फूल/फली बनने की अवस्था सिंचाई के महत्वपूर्ण चरण हैं।
खाद एवं पोषण
- मिट्टी परीक्षण के आधार पर खाद दें।
- अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद खेत की तैयारी के समय देना उपयोगी रहता है।
- नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सल्फर की मात्रा स्थानीय कृषि विभाग/KVK की अनुशंसा के अनुसार रखें।
- बिना मिट्टी परीक्षण के अधिक उर्वरक न डालें।
खरपतवार नियंत्रण
- बुवाई के बाद शुरुआती 30–40 दिन खेत को खरपतवार-मुक्त रखें।
- आवश्यकता हो तो 20–25 दिन बाद निराई-गुड़ाई करें।
- खरपतवारनाशी का चुनाव केवल स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह और लेबल निर्देश के अनुसार करें।
कीट एवं रोग प्रबंधन
- माहू, सफेद रतुआ और अल्टरनेरिया झुलसा जैसे लक्षणों की नियमित निगरानी करें।
- रोगग्रस्त पौधों या पत्तियों को देखकर तुरंत स्थानीय कृषि अधिकारी/KVK से सलाह लें।
- कीटनाशक या फफूंदनाशक का उपयोग केवल अनुशंसित उत्पाद, सही मात्रा और लेबल निर्देश के अनुसार करें।
कटाई
- जब अधिकांश फलियाँ पीली-भूरी होने लगें और दाने पक जाएँ, तब कटाई करें।
- बहुत देर करने पर फलियाँ फटने से दाना झड़ सकता है।
- कटाई के बाद फसल को सुखाकर थ्रेसिंग करें और बीज को अच्छी तरह सुखाकर ही भंडारित करें।